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विधानसभा चुनाव 2023: मारवाड़ में गहलोत की चलेगी या बेनीवाल की… या खिलेगा कमल

जयपुर. Assembly elections 2023: विधानसभा चुनाव 2023 का रंग राजस्थान में अब परवान चढऩे लगा है। ऐसे में नेता भी जनता का मूड जानने के लिए दौरों में लगे हुए हैं। वहीं पूरा देश भी राजस्थान पर नजरें लगाए बैठा है। प्रदेश में इस बार एंटी इकंबेंसी का प्रभाव कम नजर आ रहा है। क्योंकि कांग्रेस सरकार की ओर से जिस तरह से आमजन को लाभान्वित करने की घोषणाएं कर उन्हे धरातल पर उतारने का काम किया है। उस हिसाब से सरकार के खिलाफ विरोध के स्वर कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। हां ये जरूर है कि कांग्रेस अपनों से ही संघर्ष करने में लगी रही। ऐसे में विपक्ष की भूमिका निभा रही भाजपा सरकार को पिछले दो वर्षों से आरोपों से घेरे हुए हैं। प्रदेश के मिजाज की बात करें तो यहां पर सत्ता परिवर्तन का खेल बीते 30 साल से चला आ रहा है। लेकिन इस बार जनता की चुप्पी ने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे नेता भी चकराए हुए हैं। राजस्थान के मारवाड़ अंचल की बात करें तो यहां भाजपा और कांग्रेस में जबरदस्त मुकाबला देखा जा रहा है। वहीं अन्य दल भी भाजपा और कांग्रेस के नकेल डालने का काम कर रहे हैं।

अगर आज चुनाव हो तो मारवाड़ क्षेत्र में किसको कितनी सीट ?

  • कुल सीट 61
  • बीजेपी 25-30
  • कांग्रेस 30-35
  • अन्य 6

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जानिए मारवाड़ अंचल के लोगों का मिजाज
राजस्थान के मारवाड़ अंचल में कुल 8 जिले हैं। इनमें अजमेर, नागौर, बाड़मेर, जोधपुर, पाली, जालोर, शामिल हैं। मारवाड़ अंचल में कुल 61 विधानसभा सीटें आती हैं। इन 61 सीटों पर लोगों के रुझान की बात करें तो यहां भाजपा के खाते में करीब 25- 30, कांग्रेस के खाते में 30-35 और अन्य दलों छह सीटों पर सफलता हासिल कर सकते हैं।

सीएम गहलोत मारवाड़ में कायम रख पाएंगे अपना रुतबा
सीएम अशोक गहलोत भी मारवाड़ अंचल से आते हैं। उनके गृह जिले जोधपुर में 10 विधानसभा सीटें हैं। सरदारपुरा उनकी परम्परागत सीट रही है। गहलोत तीसरी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री हैं। मुख्यमंत्री रहते उन्होंने कई ऐसी योजनाएं दी है। जिसके माध्यम से जनता का दिल जीतने का काम किया है। ये योजनाएं न केवल राजस्थान प्रदेश बल्कि देश के लिए भी मिसाल बनी है। ऐसे में माना जा रहा है कि जनता का मूड फिर से कांग्रेस की तरफ नजर आ रहा है। हालांकि जनता ने अभी अपना मूड जाहिर नहीं किया है, लेकिन कांग्रेस सरकार रीपिट होने को लेकर आश्वस्त है। वहीं भाजपा ने भी सत्ता हथियाने के लिए कांग्रेस को पूरी तरह से घेरने की योजना बना ली है। प्रदेश में माना जा रहा है कि गहलोत पिछले चुनावों में दो बार मुख्यमंत्री रहे थे। लेकिन इसके बावजूद भी जनता ने सत्ता पलट दी थी।

बेनीवाल का गठबंधन क्या असर दिखाएगा
मारवाड़ की राजनीति में हनुमान बेनीवाल ने नया आयाम दिया है। गत विधानसभा चुनाव से पहले बेनीवाल ने नई पार्टी का गठन किया और चुनाव में ताल ठोकी थी। पहले ही प्रयास में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के तीन विधायक विधानसभा पहुंचे। करीब 10 सीटों पर आरएलपी के प्रत्याशियों ने अच्छे वोट प्राप्त किए। अब बेनीवाल ने चंद्रशेखर रावण की आजाद समाज पार्टी के साथ गठबंधन किया है। बेनीवाल जाट, गुर्जर और मुस्लिम वोटों पर पकड़ रखते हैं और रावण दलित वर्ग के बड़े एग्रेसिव नेता हैं। इस बार दोनों मिलकर कांग्रेस और बीजेपी को सबक सिखाने का दावा कर रहे हैं और दोनों ने प्रदेश में ताल ठोक दी है। ऐसे में मेवाड क्षेत्र में अन्य दल करीब छह सीटों को प्रभावित कर सकते हैं। जिसका नुकसान दोनों दलों को हो सकता है।

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