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Rajasthan elections 2023: 30 से अधिक विधानसभा सीटों पर भाजपा के लिए बड़ा संकट बन गए बागी और निर्दलीय, डेमेज कंट्रोल कमेटी के बस में नहीं आए निर्दलीय, जीत के गड़बड़ाए सारे समीकरण

जयपुर. राजस्थान में सत्ता परिवर्तन करने को लेकर मैदान में उतरी भाजपा की सांसे फूली हुई है। क्योंकि निर्दलियों ने भाजपा के सारे समीकरणों पर पानी फेर दिया है। ये असंतोष केन्द्रीय स्तर पर प्रत्याशियों का चयन किए जाने को लेकर उपजा है। क्योंकि केन्द्रीय कमेटी ने कई विधायकों के टिकट काटे तो कई नेता मैदान में भाजपा के सामने ही खड़े हो गए हैं। जिससे भाजपा की जीत के समीकरण गड़बड़ा गए। साथ ही कई कद्दावर नेताओं ने भी टिकट नहीं मिलने पार्टी से बगावत कर मैदान में ताल ठोक दी। जिससे भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के पसीने छूट गए हैं। प्रदेश में करीब 30 सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने पार्टी प्रत्याशियों का सियासी गणित बिगाड़ दिया है। कहीं पर त्रिकोणीय तो कहीं पर चतुष्कोणीय मुकाबला होने की संभावना है।

चित्तौडग़ढ़ – लगातार दो बार चुनाव जीतते आ रहे भाजपा विधायक चंद्रभान सिंह आक्या का पार्टी ने टिकट काट दिया। आक्या का टिकट काटे जाने पर यहां भारी विरोध हुआ। आग्रह कर पुनर्विचार करने पर पार्टी ने साफ इंकार कर दिया। फिर चंद्रभान सिंह आक्या ने बागी होकर चुनाव मैदान में ताल ठोक दी। यही नहीं आक्या व उनके समर्थकों ने पार्टी की सदस्यता से भी स्तीफा दे दिया है। ऐसे मेें अब वहां भाजपा प्रत्याशी नरपत सिंह राजवी पर संकट मंडराने लगा है।

शाहपुरा – शाहपुरा (भीलवाड़ा) शीट पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे कैलाश मेघवाल चुनाव जीतते आ रहे हैं। वसुंधरा राजे के समर्थक हैं। 89 वर्षीय मेघवाल को इस बार टिकट कटने का संहेद था। उन्होंने केन्द्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए थे। इस पर बीजेपी ने उन्हें अनुशासनहीनता का नोटिस दिया। नोटिस का जवाब देने के साथ ही कैलाश मेघवाल ने पार्टी छोड़ दी। मेघवाल के पार्टी छोडऩे के बाद भाजपा ने लालाराम बैरवा को टिकट दिया। उधर कैलाश मेघवाल ने भी चुनाव मैदान में ताल ठोक दी है। मेघवाल के मैदान में होने से बैरवा की जीत खटाई में पड़ती जा रही है।

लाडपुरा – कोटा की लाडपुरा सीट पर वसुंधरा राजे के समर्थक रहे भवानी सिंह राजावत का भी टिकट काट दिया गया है। पार्टी ने मौजूदा विधायक कल्पना देवी को प्रत्याशी बनाया। चूंकि राजावत ने पहले ही ऐलान कर दिया था कि पार्टी उन्हें टिकट दे या ना दे, वे चुनाव जरूर लड़ेंगे। प्रत्याशी का ऐलान होने से पहले ही राजावत ने नामांकन दाखिल कर दिया। बाद में पार्टी ने टिकट काटा तो राजावत ने निर्दलीय चुनाव लडऩे का ऐलान कर दिया। पिछली बार भी राजावत ने नामांकन दाखिल किया था लेकिन वसुंधरा राजे के कहने से वापस ले लिया लेकिन इस बार वे मैदान में डटे हैं। अब वे भाजपा प्रत्याशी कल्पना देवी की राह में रोड़ा बन गए हैं।

सांचौर – सांचौर विधानसभा सीट से भाजपा ने लोकसभा सांसद देवजी पटेल को मैदान में उतारा तो पूर्व विधायक जीवाराम चौधरी और दानाराम चौधरी ने विरोध किया। ये दोनों चौधरी टिकट के दावेदार थे। पटेल को टिकट मिलने पर दोनों चौधरी एक हो गए। उन्होंने ऐलान किया कि दोनों में से किसी एक को टिकट दे वरना वे पार्टी के खिलाफ कदम उठाएंगे। पार्टी ने प्रत्याशी नहीं बदला तो बगावत कर पूर्व विधायक जीवाराम चौधरी ने पर्चा भर दिया। इस सीट से कांग्रेस से सुखराम बिश्नोई मैदान में है। ऐसे में भाजपा के बागियों ने भाजपा प्रत्याशी देवजी पटेल की जीत पर संकट पैदा कर दिया है।

रतनगढ़: यहां पर भाजपा ने एक बार फिर अभिनेष महर्षि पर दाव खेलकर उन्हे मैदान में उतारा है। यहां पर महर्षि के खिलाफ भारी विरोध होने के बावजूद उन्हे मैदान में उतारा गया है। महर्षि के खिलाफ पार्टी के ही पदाधिकारी थे जो मैदान में ताल ठोके हुए थे। लेकिन पार्टी ने इस विरोध को दरकिनार करते हुए महर्षि के वापस मैदान में उतार दिया है। भाजपा के लिए सबसे बड़ा संकट ओबीसी वर्ग से प्रत्याशी का मैदान में उतरना है। इस बार ओबीसी वर्ग से राधेश्याम बबेरवाल ने निर्दलीय मैदान में ताल ठोक दी। क्योंकि ओबीसी भाजपा का मूल वोट बैंक माना जाता है। यही भाजपा के हाथ से छिटक गया। ऐसे में इस वोट बैं की भरपाई कर पाना भाजपा के लिए मुश्किल प्रतीत हो रहा है।

सरदारशहर: यहां पर भाजपा ने पूर्व मंत्री राजकुमार रिणवा पर दाव खेला गया है। उन्हे प्रत्याशी बनाकर मैदान में भेजा है, लेकिन भाजपा के पूर्व विधायक अशोक पींचा के नेतृत्व में उनके कार्यकर्ताओं ने मिलकर राजकरण चौधरी जो कि नगरपालिका अध्यक्ष हैं को मैदान में उतार दिया है। ऐसे में चौधरी भी भाजपा के समीकरण बिगाड़ रहे हैं। आपको बता दें कि यहां पर लोकल बनाम बाहरी प्रत्याशी का मुद्दा छाया हुआ है। ऐसे में भाजपा के खिलाफ विरोध के स्वर मुखर हैं।

सुजानगढ़: यहां पर बीदासर की प्रधान संतोष मेघवाल को भाजपा प्रत्याशी बनाया है। इस विधानसभा क्षेत्र से पूर्व मंत्री खेमाराम मेघवाल, राजेन्द्र नायक भी दावेदारी कर रहे थे लेकिन पार्टी ने इन पर विश्वास नहीं जताया। ऐसे में अब राजेन्द्र नायक ने मैदान में ताल ठोक दी। जिसके कारण भाजपा के समीकरण पूरी तरह से गड़बड़ा गए हैं। आपको बता दें कि सुजानगढ़ एससी के लिए आरक्षित सीट है। यहां पर संतोष मेघवाल का विरोध है, ऐसे में पार्टी के समीकरण बनने की बजाय बिगड़ते ही जा रहे हैं।

इन सीटों पर भी भाजपा के लिए बड़ा संकट बने ये निर्दलीय प्रत्याशी

पिछले दिनों टिकट दिए जाने की शर्त पर छात्र नेता रविंद्र सिंह भाटी ने भाजपा की सदस्यता ली थी। उन्हें शिव से प्रत्याशी बनाने का आश्वासन दिया था। पार्टी की सदस्यता लेने के बाद भाटी चुनाव की तैयारी में जुट गए लेकिन बाद में भाटी के बजाय स्वरूप सिंह खारा को टिकट दे दिया गया। इस पर रविंद्र सिंह भाटी ने निर्दलीय ताल ठोक दी। इसी तरह झुंझुनूं से राजेन्द्र भांबू, डीडवाना से पूर्व मंत्री यूनुस खान, बाड़मेर से प्रियंका चौधरी, सूरतगढ़ से राजेन्द्र भादू, खंडेला से बंशीधर बाजिया, झोटवाड़ा से आशु सिंह सुरपुरा, सुजानगढ़ से राजेन्द्र नायक, कोटपूतली से मुकेश गोयल, जालोर से पवन मेघवाल, बस्सी से जितेन्द्र मीणा, सीकर से ताराचंद धायल, सवाई माधोपुर से आशा मीणा, फतेहपुर से मधुसूदन भिंडा, पिलानी से कैलाश मेघवाल, डग से रामचंद्र सुनेरीवाल, संगरिया से गुबाल सिंवर, मसूदा से जसवीर सिंह खरवा, ब्यावर से इंद्र सिंह, जैतारण से योगी लक्ष्मण नाथ, बूंदू से रुपेश शर्मा, अजमेर उत्तर से ज्ञानचंद सारस्वत, भीलवाड़ा से अशोक कोठारी, मकराना से हिम्मत सिंह राजपुरोहित और बयाना से ऋतु बनावत ने भी बीजेपी प्रत्याशियों की राह मुश्किल कर दी है।

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